चलते चलते
संगी साथी सब चल पड़े चले मंजिल की ओर
एक एक कर बिछड़ने लगे समीप ही मेरी ठोर
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दोस्तों
की भीड़ न थी,
जो हैं वो कम होते गए
होश आया तो पाया, हम हम से हम होते गए
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लेखन लिख लिख सब गए, लिखा कभी नहीं जाये
जो
लिखा पढ़ तुम भी लिखो लिखा सफल हो जाये
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प्याला भरा है सामने, यारों आओ अंजाम दो
राजीव
इश्के दरिया ये चूमो डुबो और जान दो
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वो
जिनसे सब मिलने को तरसते हैं
हम हैं
जो उनकी आँखों में बसते हैं
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प्याला भरा है सामने, यारों आओ अंजाम दो
राजीव
इश्के दरिया ये चूमो डुबो और जान दो
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कैसा निगोड़ा कलयुग ये आया
कलम
दवात कागद सब खाया
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छोटे कब तक छोटे रहते बड़े नही होते
जब तक
वक्त के थपेड़े पड़े नही
होते
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अब्बा
हमारे अब्बा हुए हमारे आने के बाद
अब्बा
हम भी बनेगे बस उनके आने के बाद
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गंगा नहाये पाप धुले, साबुन धोये मैल |
ऐसो
कलंक ना पाइओ,
ना
छुटे कहूँ गैल ||
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मौत आ जाये तो मैं जिंदगी पाऊं |
मरने की चाहत मैं जिए चला जाऊं ||
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मन को
भँवरा बना के काहे ढूंढे फूल|
खुशबु
तेरे तन छुपे काहे फांके चूल ||
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मन की नाव डोली फिरे, छोर नज़र ना आये |
राजीव छोर भीतर छिपा काहे धुधन जाये ||
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नारी
को ना समझो तुम नारी है कितनी कमज़ोर |
नारी
से ही नर जन्मता नर की शक्ति उसमे जोड़ ||
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दर्द का मर्म ना जाने कोई हर ज़ख्म से इसका रिश्ता है
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कभी हलक से कभी पलक से पल पल पल पल रिसता है ||
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मूक
रहो तो जग समझे किता तोकू ज्ञान |
राजीव
मुह खुलते ही खुले ज्ञानी को अज्ञान ||
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मुस्कराहट तेरा क्या कहना |
स्वर्ग का एहसास तेरा बहना ||
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सुई से तलवार तक क्यूँ कोई जान ना पाए |
शब्दों में है क्या छुपा जो घाव गंभीर बनाय||
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मेरी (बूंद) क्या बिसात जो सागर से मुकाबला करूँ |
पर सागर रखे याद मुझ बूंद से उसका अस्तित्व है ||
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कैसा
ये मोड़ आया जिंदगी हो गई खड़ी
दूर
होती जा रही रिश्ते की हर लड़ी ******
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छदम भेष धारण किये, पल पल हमे ललचाये |
कभी ये
जीवन कभी ये रिश्ते जोडन को मचलाए||
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चक्षु घुमे चहुँ ओर देखे दुनिया सारी|
क्यूँ ना देखे तन जामे चक्षु उभारी||
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राजीव
देखे जग को जग कबहू अपना होई |
एक बार
कर आँख बंद जग एक सपना होई ||
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महक महक की सुनो कोई ज़ुबां नहीं होती
महक महकेगी कहाँ यह कभी नहीं कहती
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थुल
थुल बदन को देख कर ब्रह्म ताक़त का होय
राजीव
मांस की यह गाड़ी एक पल मैं माटी होय
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प्रेम तुझसे कब कहे कर तू उसका बखान
जो बखान हो प्रेम का वो व्यापार समान
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हम जानते हैं तुमेह हमारी ज़रूरत नही
पर
जहाँ में जिया दूसरों के लिए जाता है
राजीव
पर अहसान जो दो कदम संग चले
कोई
पूछे मरने के बाद कैसे जिया जाता हैं
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तुम मिलना नही चाहते कोई बात नही
न
देखना दिखाना,
दिल
में जज़्बात सही
आग
लगानी थी ज़माने ने लगा दी
पर तन, मन की प्यास बुझाएगा
वहीं
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जीने
की तमन्ना हम भी रखते हैं
खुशिओं
के साथ गम भी रखते हैं
ठहाके
लगा कर हँसाते हैं तुमेह
पर
आँखों नम हम भी रखते हैं
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किती मानव भूल करे जोहे मौत की बात
मौत तो
वाके संग रहे रूप बदल कर ठाट |
रूप
बदल कर ठाट कबहू दबोचे तोकू
राजीव
समझ यह सच अगर समझे तोकू ||
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मौत जिंदगी को तू कब तक ढोना चाहेगी
समय समय पर उसको छध्म बाग़ दिखाएगी
बेचारी जिंदगी तेरे चुंगल से कब छुट पायेगी
राजीव बता, एक दिन ये सवयं मौत बन जायगी
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धरती को तुम जितना खोदो जितना छेदों
कुछ ना
कुछ ये देती है |
राजीव
जाने का समय जब आये तो देखो
बाँहों
में तुमेह भर लेती है ||
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अब्बा जाने को तैयार थे कहीं शहर से बाहर
हम इधर
घर में घुसे जड़ दिये थप्पड़ चार
छूकर
गाल हमने पूछा कारण तो समझाइये
बोले
वर्षफल कल है तुमेह इनाम नही चाहिये
इनाम
में चटका दिए क्या कोई कारण खास
बोले
अपने खून इक बार में होता कहाँ है पास
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तेरी आँखें न हो नम, हमने ग़म तेरे चुरा लिये
काबा
काशी हो आये,
मुस्काये
तू ये दुआ लिए
तुमने
गैर बनाया हमे,
सरेआम
रुसवा किया
राजीव
है अदा प्रेम की, सोचकर मुस्कुरा लिए
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