बस उम़्मीद का ही तो सहारा है बाकि यहॉ बचा क्या हमारा है सब कुछ इस जहाँ मे रूल गया बचा था जो ऑसूओ मे धुल गया जीवन क्या एक से बंघे तुमने वीचारा समक्ष भूल सोचा वहम हमारा है अंघेरे के पार एक सुखद सवेरा है इस सोच से उम्मीद को उभारा है बस उम़्मीद का ही तो सहारा है बाकि यहॉ बचा क्या हमारा है