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सोचता हूँ

सोचता हूँ क्या सोचता हूँ मैं क्या सिर्फ सोचकर सोचता हूँ मैं सोचता हूँ क्यूँ सोचता हूँ मैं
🤣प्रभुजी करो स्वाहा क्रोना प्रभुजी करो स्वाहा क्रोना  क्रोना तुमेह बहुत ध्यावे उसे यम द्वार भावे उस पर कृपा कर दो ना प्रभुजी रखो अपने संगमा प्रभुजी करो स्वाहा क्रोना प्रभु तूने राह दिखालाई दिखी सब or   सफाई जो कोई बाहर ना जावे क्रोना उसको ना खावे प्रभुजी रखो अपने संगमा प्रभुजी करो स्वाहा करोना तुम्हारे प्यार का bhukha रहा तो हर तरफ सूखा  चीन ने कपूत है जना  पड़ा खुद को कैद करना प्रभुजी रखो अपने संगमा 🤣प्रभुजी करो स्वाहा क्रोना हम धोवे अपने हाथ क्रोना को लगे है घात प्रभुजी उसको अब हरना वर्ना हमें पड़ेगा मरना प्रभुजी रखो अपने संगमा प्रभुजी करो स्वाहा क्रोना

कैसे कब हीुआ

 बचपन से लिखता हूँ  दिवंगत  कवि श्री रमेश रंजकजी और  हमारे हिन्दी के अध़य़ापक  श्रीमान किशन कूमार सूमनजी ने  मेरी कविता लेखन की रुचि को देखकर मुझे काव्य लेखन के विषय मे समझाया मात्राओ का ग्यान कराया दोनो गूरूओ के मार्ग दर्शन के कारण मै धीरे धीरे आगे बढने लगा  ऊसके  बाद जहाँ  चाह होती हैं  वहाँ  राह होती है  जब मैं  स्नातक कर रहा था  लब मुझे  गुरु के रुप में परम आदरणीय डा गौविंद व्यास जी का  मार्गदर्शन मिला  और मै एक कवि  के रुप में  आपके  सामने अपनी रचनाओ को सहेज कर काव्य पाठ कर रहा हूँ