प्रेम
प्रेम प्रेम तो सब कहें प्रेम न जाने कोइ जो प्रेम को जान लो प्रेम कभी न होय प्रेम तोसे कब कहे कीजोवाको बखान जो बखान हो प्रेम का ता व्यापार समान वो जो कहे चाँद तो मै चाँद्य तोड़ लाऊँ सूरज की चाह करे किरणो समेत पकडा़ऊँ पर वो माँगे प्रेम है मै प्रेम कहाँ से लाऊँ येआन्तरीक अनुभूती है ये कैसे समझाऊँ