कैसे कब हीुआ
बचपन से लिखता हूँ दिवंगत कवि श्री रमेश रंजकजी और हमारे हिन्दी के अध़य़ापक श्रीमान किशन कूमार सूमनजी ने मेरी कविता लेखन की रुचि को देखकर मुझे काव्य लेखन के विषय मे समझाया मात्राओ का ग्यान कराया दोनो गूरूओ के मार्ग दर्शन के कारण मै धीरे धीरे आगे बढने लगा ऊसके बाद जहाँ चाह होती हैं वहाँ राह होती है जब मैं स्नातक कर रहा था लब मुझे गुरु के रुप में परम आदरणीय डा गौविंद व्यास जी का मार्गदर्शन मिला और मै एक कवि के रुप में आपके सामने अपनी रचनाओ को सहेज कर काव्य पाठ कर रहा हूँ
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